Description
यह पुस्तक जहाँ प्रत्येक आस्तिक हिन्दू गृहस्थ को अपने धर्म तथा संस्कृति से जोड़ती है; वहीं नास्तिक, हिन्दू-इतर जिज्ञासु को हिन्दू संस्कृति से परिचित भी कराती है। आज समय के अभाव एवं विपरीत वातावरण के प्रभाव से हम अपने धर्मशास्त्रों से दूर हो गए है। यह पुस्तक उन्हीं धर्मशास्त्रों के निचोड़ को सरल भाषा में पाठकों के सम्मुख रखती है। गृहस्थ जनों के विभिन्न विषयों जैसे व्रत-उपवास एवं तीर्थयात्रा के नियम क्या हैं? घर का पूजा कक्ष कैसा हो? नित्य पूजा कैसे करें? होली, दिवाली आदि पर्वो को उत्तम रीति से कैसे मनाये ? बच्चों का चरित्र निर्माण कैसे हो? पति-पत्नी के बीच उत्तरोत्तर प्रेम बढ़ाने के क्या उपाय है? सुख-सौभाग्यमय जीवन का क्या रहस्य है?
किस देवी-देवता की आराधना करें और कैसे करें? गुरु किसे बनाया जाये? अपने कुलदेवी कुलदेवता को प्रसन कैसे करें? स्वप्न-दर्शन, यात्रारम्भ के शुभाशुभ शकुन क्या हैं? जैसे अनेक प्रश्नों का उत्तर इस पुस्तक में प्राप्त होता है; वह भी शास्त्र-प्रमाण के साथ। शास्त्रों के मन्तव्यों को भी वर्तमान काल के अनुरूप ही प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। यदि आप गृहस्थाश्रम के विभिन्न धार्मिक सांस्कृतिक आचारों को समझना चाहते हैं; तो यह पुस्तक आपको अवश्य पढ़नी चाहिए।