Description
साहित्य पुरोधा, साहित्य प्रणेता, साहित्य शिरोमणि, हिंदी कहानी के दैदीप्यमान नक्षत्र, कथा साहित्य अग्रणी, कथा मर्मज्ञ तथा कहानी को अपनी लेखन कला से अलंकृत करने वाले कथा सर्जक मुंशी प्रेमचंद ने हिंदी कहानी में यथार्थवाद के रूप में एक नई परंपरा का सूत्रपात किया, जिसने आने वाले साहित्यकारों का मार्गदर्शन किया। वस्तुतः कथा साहित्य में यथार्थवाद एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में अवतरित हुआ। प्रेमचंद के लेखन की सर्वतो-मुखी विशेषता उनकी कहानियों के पात्र हैं, जो लगता है उनके ही परिवेश से गृहित हैं। इन्होंने कहानी के द्वारा व्यक्ति के स्वभाव की मूलभूत महत्ता को स्थापित किया है।
इनकी कहानियों में तत्कालीन इतिहास का स्वर मुखर होता हुआ प्रतीत होता है। इनकी कहानी सामयिक हैं, कालजयी हैं, जिनकी महत्ता हमेशा रही है और आगे भी रहेगी। इन्होंने अपनी कहानियों से हिंदी कथा साहित्य को अत्यंत समृद्ध किया है, लेकिन यहाँ पर उनकी प्रमुख कहानियों को, जो मेरी समझ से महत्त्वपूर्ण है, उपयोगी हैं, चर्चित हैं, रोचक हैं तथा समाज की दृष्टि से जिनकी महत्ता सर्वसिद्ध है, ग्रहण करते हुए उन्हें "प्रेमचंद की चर्चित कहानियाँ" संग्रह के माध्यम से संकलित करने का एक छोटा-सा प्रयास किया है। इसके अंतर्गत सत्रह कहानियों को संकलित किया गया है-
इस संग्रह में सर्वप्रथम "माँ "कहानी में एक स्वतंत्रता सेनानी पति आदित्य की पत्नी के रूप में तथा बेटे प्रकाश की माँ के रूप में करुणा के संपूर्ण जीवन के व्यक्तित्व का चित्र खींचा गया है। स्वतंत्रता सेनानी आदित्य का जेल जाना फिर वापस घर आते ही मृत्यु को प्राप्त होना करुणा का अकेले अपने बेटे प्रकाश का पालन-पोषण इस प्रकार करना कि उसमें पति के गुणों का समावेश हो जाएं, परंतु वह ज्यों-ज्यों बड़ा होता गया, उसकी महत्वाकांक्षाएं बढ़ती गई और वह करुणा की इच्छा के विरुद्ध पढ़ाई के लिए विदेश चला जाता है।