Description
प्रस्तावना
यह संसार बहुत विशाल है इसमें अनेकों प्रकार के जीव-जन्तु विराजमान हैं। इस जीव-जन्तु का निर्माता स्वयं परमात्मा है। परमात्मा ने इन्हीं जीव-जन्तु की सुरक्षा हेतु अनेकों मानवों को जन्म दिया है। लेकिन इन्हीं मानवों में से आज विश्व समाज का कतिपय मानव अपने मानवीय धर्म (सबको सम्मानपूर्वक अपनी सामर्थ्यानुसार सेवा करना) से विमुख होकर नीच मनुष्य की कोटि में आ गया है। जिसके परिणाम स्वरूप आज विश्व समाज में जातिवाद (कर्म को ध्यान में न देकर कुछ मूर्ख मनुष्य जन्म के आधार पर समाज के मानवों को ऊँच-नीच कह देना), हिंसा (जीवों को मारना), अंधविश्वास (विना सोचे समझे मूर्ख मनुष्य की बातों पर विश्वास कर लेना, धर्म, पर्व के नाम पर जीवों को मारना-काटना आदि), भुखमरी, भ्रष्टाचार आदि कुरीतियाँ चरम सीमा तक पहुँच गई हैं। जिन कुरीतियों के कारण अधिकतर भोले-भाले मानव एवं जीव-जन्तु का जीवन बहुत ही ज्यादा दुःखदायी हो गया है। इसीलिए मेरे हृदय में यह कष्ट चुभ ही रहा था कि हम कैसे इन जीव-जन्तु एवं भोले-भाले मानव के कष्टों को कम करें। यह इतना आसान नहीं है क्योंकि संसार बहुत विशाल है और इसमें अनन्त प्रकार के जीव-जन्तु एवं मानव हैं। फिर हमने परमात्मा की कृपा से हिम्मत जुटायी कि क्यों न हम अपनी लेखनी एवं कर्मों के माध्यम से इनके कष्टों को दूर करने में लग जायें, हो सकता है कि इससे संसार के मानव एवं जीव-जन्तु से युक्त विश्व समाज का कुछ ही कष्ट कम हो सके। इसीलिए मैंने ऐसा मानकर अपने से पूर्ववर्ती ऋषि-मुनियों,