{"product_id":"खुद्दकपाठ","title":"खुद्दकपाठ - Khuddakapatha","description":"\u003cp style=\"text-align: left;\"\u003eखुद्दक-पाठ खुद्दकनिकाय के अन्तर्गत पंन्द्रह पुस्तकों में से पहली पुस्तक है। इसमें त्रिशरण, दस शिक्षापद, बत्तीस आकार, कुमार-प्रश्न तथा पाँच सूत्र मंगल, रतन, तिरोकुड्ड, निधिकण्ड, मेत्त-अन्तर्गत हैं। त्रिशरण को हम बौद्धों के दीक्षा-पाठ कह सकते हैं; क्योंकि दीक्षा के समय इन पाठों का उच्चारण कर तीन शरण ग्रहण की जाती हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp style=\"text-align: left;\"\u003eदस शिक्षापद विशेष रूप से श्रामणेरों के लिए विहित दस नियम हैं, जिनका पालन समय-समय पर उपासक या उपासिकायें भी करती हैं। बत्तीस आकार शरीर के अन्तर्गत बत्तीस हिस्सों की एक तालिका है। इस विश्लेषण में शरीर का यथास्वभाव दिखाया गया है। यह काम की प्रतिपक्ष भावना है; इसलिए इसे कायगता-स्मृति भावना भी कहते हैं। कुमार-प्रश्न के अन्तर्गत दस प्रश्न तथा उनके उत्तर हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp style=\"text-align: left;\"\u003eसभी प्रश्न अपना-अपना महत्त्व रखते हैं। इनमें कोई क्रमागत महत्त्व नहीं है। हाँ, संख्या के अनुसार वे क्रमबद्ध हैं। खुद्दक-पाठ के अन्तर्गत सूत्रों में से तीन सूत्र मंगल, रतन तथा मेत्त- सुत्तनिपात में भी मिलते हैं और तिरोकुड्डुसुत्त पेतवत्थु में मिलता है। इसलिए जहाँ तक सूत्रों का सम्बन्ध है, एक निधिकण्डसुत्त ही खुद्दक-पाठ की अपनी विशेषता है। इनमें से मंगल, रतन तथा मेत्तसुत्त बौद्ध देशों में प्रतिदिन पाठ किये जाते हैं। इन सूत्रों का अलग-अलग परिचय सूत्रों के आरम्भ में दिया गया है।\u003c\/p\u003e","brand":"Bhikkhu Dr. Dharmaratna","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49128036008074,"sku":"9789334421187","price":180.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0592\/8583\/1818\/files\/IMG_20260506_0001.jpg?v=1778059513","url":"https:\/\/www.motilalbanarsidass.com\/en-us\/products\/%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%95%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a0","provider":"Motilal Banarsidass","version":"1.0","type":"link"}