{"product_id":"पुरातत्व-निबंधावली-archaeological-essay","title":"पुरातत्व निबंधावली - Archaeological Essay","description":"\u003cp style=\"text-align: left;\"\u003eपुरातत्त्व-निबन्धावली पाठकोंके सम्मुख उपस्थित की जा रही है। ये निबन्ध भिन्न भिन्न समयपर भिन्न भिन्न पत्रोंमें निकले थे। कई जगहों-पर फिरसे लिखनेकी आवश्यकता थी, लेकिन वैसा करनेके लिए पुस्तकके प्रकाशनको एक अनिश्चित कालके लिये रोक रखना पळता जो कि मेरे कई दोस्तोंको पसन्द नहीं होता। जल्दी जल्दी में जितना हो सका है, प्रूफ्को मैंने एक बार देख लिया है। पुरातत्त्वके अध्ययनके लिये मानवविकास का ज्ञान आवश्यक है। मैंने इस सम्बन्धमें \"साम्यवाद ही क्यों\" की भूमिकामें लिख दिया है, इसलिये उसे यहाँ नहीं दुहराया गया। परिशिष्ट (१) के लिये में रायबहादुर बा० दुर्गाप्रसाद B. A. (बनारस) का विशेष आभारी हूँ। त्रुटियोंके लिये क्षमाप्रार्थी-\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rahul Sankrityayan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":47163565801610,"sku":null,"price":675.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0592\/8583\/1818\/files\/Archaeological_Essay.jpg?v=1759997059","url":"https:\/\/www.motilalbanarsidass.com\/en-us\/products\/%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b2%e0%a5%80-archaeological-essay","provider":"Motilal Banarsidass","version":"1.0","type":"link"}