{"product_id":"साहित्यिक-अन्तर्वार्ताएँ","title":"साहित्यिक अन्तर्वार्ताएँ","description":"\u003cp style=\"text-align: left;\"\u003eसाहित्यिक अन्तर्वाताएँ साक्षात्कार विधा की एक प्रमुख कृति है, जिसमें वार्ताकार डॉ. जयशंकर शुक्ल ने देश, काल और वातावरण को ध्यान में रखते हुए संवाद की प्रचलित मान्यताओं को आज के संवेदनशीलता एवं मानवीय सरोकारों के संदर्भ में तथ्यों को तर्कों के आलोक में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है वार्ताकार डॉ. जयशंकर शुक्ल ने मूलतः गीत के अधुनातन छांदस स्वरूप नवगीत को अपनी अभिव्यक्ति का आधार बनाया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp style=\"text-align: left;\"\u003eउनकी इस अभिव्यक्ति में साक्षात्कार दाताओं के विचार, भाव एवं रचनाधर्मिता न्यूनाधिक रूप से समाहित हैं। साक्षात्कार विधा अत्यंत प्राचीन विधा के रूप में मान्यता प्रचलित है। वैदिक ऋचाओं के उद्भव में आप्त ऋषियों ने अपने हृदय में उन्हें प्राप्त कर जनमानस के कल्याण हेतु गुरु-शिष्य परम्परा में वाचिक विधा के द्वारा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाते रहे हैं। इन सभी प्रक्रियागत कार्यों की परिणति मूलतः व्यक्ति को उसके आत्मसाक्षात्कार की ओर ले जाती है। यह श्रेय है, जिसे प्रेय के साथ प्राप्त किया जा सकता है। संस्कृत वांग्मय में हमारी श्रुति एवं स्मृति दोनों साक्षात्कार परम्परा द्वारा ही अस्तित्वमान् हैं।\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"JayShankar Shukla","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49426475352202,"sku":"9788194969297","price":787.5,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0592\/8583\/1818\/files\/IMG_20260515_0005.jpg?v=1778826461","url":"https:\/\/www.motilalbanarsidass.com\/en-us\/products\/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81","provider":"Motilal Banarsidass","version":"1.0","type":"link"}