Description
"अलङ्कारभूषण" रचनाकार डॉ. कुन्दन कुमार की अति प्रसिद्ध कृति है। उन्होंने अलङ्कारभूषण के अन्तर्गत संस्कृत से सम्बद्ध सामग्री के होते हुए भी न केवल संस्कृत अपितु हिन्दी के पाठकों, शोधकर्ताओं और अन्वेषकों के लिए अलङ्कार की बहु प्रतीक्षित सन्दर्भ से युक्त कृति को प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया है। इससे न केवल साहित्य जगत् अपितु सम्पूर्ण रचना और शोध को समर्पित व्यक्ति भी अलङ्कारभूषण जैसी कृति से अवश्य ही लाभान्वित होंगे।
डॉ. कुन्दन कुमार इस कृति के माध्यम से विविध भाव-भूमि के अलंकारों को उदाहरणों के साथ अपनी स्वयं की व्याख्या और विवेचन दे कर के चुप नहीं हो जाते वरन इसके आगे विश्लेषण तक इस बात को ले जाते हैं। यह इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता है। मैं व्यक्तिगत तौर पर डॉ. कुन्दन कुमार को अलङ्कारभूषण के लेखन के लिए हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।
साथ ही साथ ऐसे माननीय व्यक्तित्व के गरिमापूर्ण कार्य को मर्यादित रूप से जन सामान्य के समक्ष रखने की इस प्रक्रिया को मैं यज्ञ के समकक्ष मानता हूँ। यह लोक कल्याणार्थ किया गया ऐसा यज्ञ है जिससे यह साहित्य जगत् युगों युगों तक लाभान्वित होता रहेगा। सामान्य अलङ्कार की बात आने पर सब लोग कुछ अलंकारों तक ही स्वयं को सीमित कर पाते हैं; जबकि अलंकारों की दुनिया बहुत ही विलक्षण है। शब्दालंकार और अर्थालंकार के चमत्कार को देखा जाए तो यह सशक्त रूपों में हमारे सामने आती है।
एक कवि के लिए इन अलंकारों का प्रयोग करना उसके अपने काव्य में चारुता की वृद्धि करता है। यहाँ पर कवि, कथाकार निबन्धकार अथवा हिन्दी की विविध विधाओं में लेखन करने वाले लोगों के साथ-साथ शोधार्थियों के लिए एक विस्तृत विवेचन पूर्ण अभिलेख प्रस्तुत करने सके क्रम में डॉ. कुन्दन कुमार ने एक विशेष कार्य किया है। इस कार्य को मैं हृदय से साधुवाद देता हूँ तथा उन्हें वैसी ही कृतियों के लेखन में निरन्तर लगे रहने की अनुशंसा भी करता हूँ।