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श्रीमद्भागवत में जीवन दर्शन

श्रीमद्भागवत में जीवन दर्शन

Publisher: Eastern Book Linkers
Language: Sanskrit Text With Hindi Translation
Total Pages: 304
Available in: Hardbound
Regular price Rs. 950.00
Unit price per
Tax included.

Description

श्रीमद्भागवत मानव मात्र का उपकारी ग्रन्थ है। द्वादश स्कन्धों में विभक्त इस ग्रन्थ के 18000 श्लोकों में उपदिष्ट जीवन दर्शन मनुष्य को संसार-सागर से सुखपूर्वक पार होने के लिए एवं जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति पाने के लिए एक अद्भुत साधन है। भगवान् नारायण की साक्षात् वाङ्मयी मूर्ति (इंद भागवतं नाम पुराणं ब्रह्मसम्मितम्, भाग०, 2.8.28; 1.3.40) इस भागवत पुराण के पठन एवं श्रवण मात्र से मनुष्य की तापत्रय से मुक्ति हो जाती है और इस जगत् में धर्मार्थकाममोक्ष रूप पुरुषार्थ की कामना करने वालों के लिए भागवत में प्रतिपादित श्रीहरि का संकीर्तन ही एक मात्र उपाय है (भाग०, 4.8. 41)। 

जहाँ यह पुराण एक ओर मनुष्य के लिए मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है, वहीं दूसरी ओर लौकिक जीवन के सौख्य के लिए अनेक सुन्दर उपायों और शाश्वत मूल्यों का भी उपदेश करता है। तदनुसार परिश्रमपूर्वक अर्जित धन का धर्मपूर्वक उपयोग इहलोक में तो सुख का कारण बनता ही है, पर परलोक में भी निःश्रेयस् का हेतु बनता है। इस पुराण में जीवन-दर्शन-सम्बन्धी अनेक उपदेश दृष्टव्य हैं। महर्षि वेदव्यास द्वारा उपदिष्ट मानव जीवन के लिए उपादेय इन विविध पक्षों को पाठक तक पहुँचाने का प्रयास समय-समय पर यथामति होता रहा है। प्रस्तुत ग्रन्थ भी उसी दिशा में एक स्तुत्य प्रयास है।