Description
संस्कृत-कवि-हृदयम् संस्कृत-साहित्य में एक नवीन विधा प्रस्तुत करता है। संस्कृत के महाकवियों और कवियों के विषय में अनेक उच्चकोटि के ग्रन्थ गद्य में हैं, परन्तु पद्यात्मक रूप में कोई रचना उपलब्ध नहीं है, जिससे संस्कृत-प्रेमी उन महाकाव्यकारों और कवियों के जीवनवृत्त, कृतित्व और उनकी रचना-शैली आदि के विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकें तथा उन कवियों की कुछ विशेषताओं को स्मरण कर सकें। इस अभाव की पूर्ति के लिए इस ग्रन्थ की रचना की गई है।
इस ग्रन्थ में महर्षि वाल्मीकि से लेकर ३२ महाकवियों का जीवन-वृत्त, कृतित्व और उनके काव्यों की विशेषताओं आदि का पद्यात्मक रूप में विस्तृत विवरण दिया गया है। काव्य की भाषा सरल और सुबोध है। प्रत्येक कवि की शैली, काव्यशास्त्रीय विशेषताओं आदि का विशेषरूप से विवरण दिया गया है। इनमें विशेष उल्लेखनीय महाकवि ये हैं- महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वेदव्यास, कालिदास, अश्वघोष, भारवि, माघ, श्रीहर्ष और आचार्य भट्टि । नाटककारों में महाकवि कालिदास, शूद्रक, विशाखदत्त, श्रीहर्षदेव, भट्टनारायण, भवभूति, मुरारि और राजशेखर। गद्यकाव्यकारों में आचार्य दण्डी, सुबन्धु, बाण, अम्बिकादत्त व्यास, हृषीकेश भट्टाचार्य और पंडिता क्षमाराव । गीतिकाव्यकारों में भर्तृहरि, अमरुक, जयदेव और पंडितराज जगन्नाथ । ऐतिहासिक काव्यकारों में बिल्हण और कल्हण ।
डॉ० कपिलदेव द्विवेदी संस्कृत-साहित्य के मूर्धन्य विद्वानों में हैं। वे आलोचक, भाषाशास्त्री और वैदिक विद्वान् होने के साथ ही सिद्धहस्त कवि हैं। आशा है यह ग्रन्थ संस्कृतप्रेमियों को रुचिकर सिद्ध होगा।