Description
"हिंदुत्व अवधारणा, वर्शन, संस्कृति और समकालीन विमर्श भारतीय सभ्यता, संस्कृति, दर्शन और राष्ट्रीय चिंतन के विविध आयामों का संतुलित, शोधपरक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करने वाला एक गंभीर ग्रंथ है। इस पुस्तक का उद्देश्य हिंदुत्व की अवधारणा को केवल एक सीमित वैचारिक परिप्रेक्ष्य में नहीं, चल्कि उसके ऐतिहासिक विकास, दार्शनिक आधार, सांस्कृतिक स्वरूप, सामाजिक प्रभाव तथा समकालीन विमर्शी के व्यापक संदर्भमें समझना है।
ग्रंथ में वैदिक साहित्य, उपनिषद, रामायण, महाभारत, भगवद्गीता तथा भारतीय दर्शन की प्रमुख परंपराओं के आलोक में हिंदत्व के मूल तत्वों का विवेचन किया गया है। साथ ही, आधुनिक भारतीय चिंतको के विचारों, भारतीय संविधान, सांस्कृतिक राष्ट्रचेतना, सामाजिक समरसता, शिक्षा, पर्यावरण, वैश्वीकरण, विश्वशांति तथा भारत की भविष्यगत भूमिका जैसे विषयों का संतुलित और विवेकपूर्ण
विश्लेषण भी प्रस्तुत किया गया है।
यह पुस्तक भारतीय सस्कृति की उस दीर्घजीवी परंपरा को रेखांकित करती है, जिसकी आधारशिला मंवाद, समन्वय, सह-अस्तित्व, सत्य, धर्म और लोककल्याणण जैसे सार्वकालिक मूल्यों पर आधारित रही है। लेखक ने विभिन्न दृष्टिकोणों का सम्मान करते हुए विषय का विवेचन प्रमाण, तर्क और अकादमिक दृष्टि से करने का प्रयास किया है. जिससे पाठक स्वयं विचार करने के लिए प्रेरित हो सके।
यह ग्रंथ विद्यार्थियों, शोधार्थियों, अध्यापको प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों तथा भारतीय इतिहास, दर्शन, संस्कृति और समकालीन वैचारिक विमर्श में रुचि रखने वाले सभी पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी है। ज्ञान, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना के मध्य सेतु का कार्य करने वाली यह पुस्तक भारतीय सभ्यता के बहुआयामी स्वरूप को समझने का एक गंभीर और सार्थक प्रयास है।