{"product_id":"चाणक्यनीतिदर्पणः","title":"चाणक्यनीतिदर्पणः","description":"\u003cp style=\"text-align: left;\"\u003eसंस्कृत वाङ्मय विविध शास्त्रों से समृद्ध है। प्राचीनकाल में न्यायशास्त्र एवं धर्मशास्त्र के साथ नीतिशास्त्र का विशिष्ट सम्बन्ध रहा। उन्हीं शास्त्रों से संवलित एवं लोक-व्यवहार की गूढ़तम धारणाओं से परिपुष्ट राजशास्त्र अथवा राजनीतिशास्त्र भारतीय वाङ्मय का प्रमुख प्रतिपाद्य विषय रहा है। इस शास्त्र का नाम आचार्य चाणक्य से सम्बद्ध होने से राजनीतिशास्त्र को चाणक्यनीति अथवा कौटिल्यशास्त्र के नाम से भी अभिहित किया जाता है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp style=\"text-align: left;\"\u003eआचार्य चाणक्य ने राजनीति, लोकनीति तथा धर्मनीति का समन्वय कर कुछ ऐसे ग्रन्थों की रचना की, जिनमें नीतिपक्ष की प्रधानता लोक व्यवहार के आधार पर दिखाई गई है। 'चाणक्यनीतिदर्पणः' इसी प्रकार की रचना है। इसका अन्यं नाम 'राजनीतिसमुच्चयः' है, जिससे स्पष्ट हो जाता है कि इसमें लोकाचार के आधार पर राजनीति से सम्बन्धित तत्त्वों का समावेश किया गया है। आचार्य चाणक्य द्वारा रचित 'राजनीतिशास्त्र' तथा 'अर्थशास्त्र' को हृदयंगम करने के लिए 'चाणक्यनीतिदर्पणः' भूमिका स्वरूप है। इस कारण इस ग्रन्थ का विशेष महत्त्व है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp style=\"text-align: left;\"\u003e'चाणक्यनीतिदर्पणः' का प्रकाशन यद्यपि पहले भी हो चुका है, परन्तु प्रस्तुत रचना में शुद्ध एवं संगत पाठ का सम्पादन संशोधन करने का प्रयास किया गया है ताकि महामति आचार्य चाणक्य की अवधारणा का सुसम्यक् प्रकाशन हो सके। ग्रन्थारम्भ में आचार्य-परिचय तथा परिशिष्ट में श्लोकानुक्रमणिका का समावेश कर इसे उपादेय बनाया गया है।\u003c\/p\u003e","brand":"Dr. Rupnarayan Tripathi","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50133497708682,"sku":"818724769X","price":300.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0592\/8583\/1818\/files\/IMG_20260904_0001.jpg?v=1788498569","url":"https:\/\/www.motilalbanarsidass.com\/products\/%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%a3%e0%a4%83","provider":"Motilal Banarsidass","version":"1.0","type":"link"}