{"product_id":"जैवधर्म-jaiv-dharm","title":"जैवधर्म- jaiva Dharm","description":"\u003cp style=\"text-align: center;\"\u003e\u003cstrong\u003eप्रस्तावना\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp style=\"text-align: left;\"\u003eपृथ्वीतल पर बहुत-से धर्म-सम्प्रदाय प्रचलित हैं। उनमेंसे अधिकांश सम्प्रदायोंमें ही तत्तद्धर्म-प्रचारके उद्देश्यसे विविध प्रकारकी प्रणालियोंका अवलम्बन कर विभिन्न भाषाओंमें अनेकानेक ग्रन्थ लिपिबद्ध हुए हैं। जिस प्रकार लौकिक शिक्षामें कनिष्ठ, मध्यम और उत्तमका भेद अथवा ऊँच-नीच आदि विविध प्रकारके तारतम्य स्वतः सिद्ध हैं, उसी प्रकार विभिन्न धर्म-सम्प्रदायोंकी धर्म-शिक्षाओंमें भी विभिन्न प्रकारके तारतम्य सर्ववादीसम्मत एवं स्वतः सिद्ध हैं । इनमेंसे श्रीचैतन्य महाप्रभुके प्रेम- धर्मकी शिक्षा सभी दृष्टिसे सर्वोत्तम है - इसे विश्वके सभी निरपेक्ष मनीषीवृन्द एक स्वरसे स्वीकार करेंगे। सर्वोत्तम आदर्श और शिक्षासे अनुप्राणित होनेकी आकांक्षा सभीमें ही परिलक्षित होती है। उन लोगोंकी यह शुभेच्छा कैसे फलवती हो - इसका विचार करके ही परममुक्त पुरुष तथा धर्म- जगत्के प्रधान आदर्श शिक्षित कुलचूड़ामणि श्रील ठाकुर भक्तिविनोदने विभिन्न भाषाओंमें अनेकानेक धर्म-ग्रन्थोंका सृजन किया है । इन ग्रन्थोंमें श्रीचैतन्य महाप्रभुकी शिक्षाओंका ही अतिशय सरल सहज भाषामें साङ्गोपाङ्ग वर्णन उपलब्ध होता है । लेखककी सम्पूर्ण ग्रन्थराशिमें इस 'जैवधर्म' ग्रन्थको ही विभिन्न देशीय धार्मिक मनीषियोंने सर्वोत्तम माना है।\u003cbr\u003eविश्वमें वेद ही सबसे प्राचीनतम ग्रन्थ हैं। तदनुगत उपनिषद्समूह एवं श्रीवेदव्यास द्वारा प्रकटित वेदान्तसूत्र, महाभारत और श्रीमद्भागवत आदि आदर्श ग्रन्थ हैं। आगे चलकर इसी आदर्शसे अनुप्राणित होकर भारतवर्षमें अनेकों प्रकरण-ग्रन्थ लिखे गये, जिनका स्थान-स्थानपर प्रचुर प्रचार और आदर है। इन प्रकरण-ग्रन्थोंमें तारतम्य, वैशिष्ट्य और भेद आदिकी तो बात ही क्या, परस्पर सामञ्जस्यरहित विभिन्न प्रकारके मतभेद और काल्पनिक विचारधाराएँ भी परिलक्षित होती हैं । फलस्वरूप धर्म-जगत् में नाना प्रकारके उथल-पुथल और उपद्रव हुए हैं और हो रहे हैं। ऐसी विकट परिस्थितिमें स्वयं भगवान्ने परतत्त्वके\u003c\/p\u003e","brand":"Sheel Thakur Bhakti Vinod","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":46862785773706,"sku":null,"price":695.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0592\/8583\/1818\/files\/IMG_20250822_0001_page-0001.jpg?v=1755838572","url":"https:\/\/www.motilalbanarsidass.com\/products\/%e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-jaiv-dharm","provider":"Motilal Banarsidass","version":"1.0","type":"link"}