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प्रमुख संस्कृत रूपकों में अद्भुत रस का शास्त्रीय अध्ययन

प्रमुख संस्कृत रूपकों में अद्भुत रस का शास्त्रीय अध्ययन

Publisher: Parimal Publication Pvt. Ltd.
Language: Sanskrit Text with Hindi Translation
Total Pages: 597
Available in: Hardbound
Regular price Rs. 850.00
Unit price per
Tax included.

Description

आचार्य भरत मुनि द्वारा कहे गए नाट्य रसों में संस्कृत में शोध के क्षेत्र में प्रायः उपेक्षित अद्भुत रस का नाट्य साहित्य के सन्दर्भ में व्यावहारिक या प्रायोगिक अध्ययन करना गुरुजनों के परामर्श से उचित समझा और मैंने भी शोध की दृष्टि से यह अनुभव किया कि शृङ्गार, वीर, करुण और हास्य आदि रसों पर महत्त्वपूर्ण शोधकार्य हो चुका है, परन्तु अद्भुत रस इस दृष्टि से अभी तक सर्वथा अछूता ही है और इसी भाव से प्रेरित होकर दृश्यकाव्य के सन्दर्भ में विस्मय भाव के व्यापक एवं गहन अध्ययन की ओर मेरी रुचि जाग्रत हुई। चूँकि अद्भुत रस के व्यापक पक्षों और रूपों का उद्घाटन नहीं हो पाया है अतः प्रस्तुत शोध प्रबन्ध में इसी अभाव की पूर्ति का प्रयत्न किया गया है और इसीलिए तद्विषयक मेरे मस्तिष्क में उठती हुई उन्हीं वैचारिक तरंगों का मूर्तस्वरूप यह शोध प्रबन्ध है। 

मैंने यहाँ शोध प्रबन्ध के शीर्षक में प्रयुक्त 'रूपक' शब्द का प्रयोग 'नाटक' शब्द के प्रचलित अर्थ नाट्य-साहित्य के अर्थ में किया है, न कि आचार्य विश्वनाथ कृत रूपक के नाटक आदि दस भेदों के अर्थ में।

यह प्रस्तुत शोध प्रबन्ध जिन मनीषियों के आशीर्वाद का प्रतिफल है, उनका पुण्य स्मरण करना मेरा पुनीत कर्तव्य है। इस हेतु सर्वविद्या की राजधानी काशी (वाराणसी) के विश्वविश्रुत बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के संस्कृतविद्या धर्म विज्ञान संकाय के अन्तर्गत वैदिक दर्शन विभाग में सरस्वती समुपासक बनने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिसका सर्वप्रथम श्रेय सर्वथा सर्वदा स्मरणीय, अर्चनीय मेरे अप्रत्यक्ष मार्गदर्शक जीवन्मुक्त गुरुवर्य श्री खेमचन्द जी महाराज जी को ही जाता है, जिनकी अदृश्य प्रेरणा और अखिल ब्रह्माण्ड सम्राट् बाबा विश्वनाथ की असीम अनुकम्पा से मैं पूर्णतया स्वस्थ रहा और तत्फलस्वरूप यह प्रस्तुत शोध प्रबन्ध वर्तमान स्वरूप को प्राप्त कर सका।