Description
प्राचीन काल में पुत्रेष्टि, वर्षेष्टि गयादि यज्ञ सफलतापूर्वक हुआ करते थे और उनसे यजमान इष्ट फल प्राप्त किया करते थे, पीछे से इन यज्ञों की कथा अनेक शुभ कार्यों की तरह छूट गई परन्तु आर्य समाज के प्रादुर्भाव से इस प्रकार के यज्ञों के होने की बात जिधर-तिधर फिर से कभी-कभी सुनाई देने लगी है-परन्तु किस प्रकार इन यज्ञों को करना चाहिए, इनकी पद्धति क्या होनी चाहिए, किस मर्यादा के साथ यजमान को रहना चाहिए इन सभी प्रश्नों के उत्तर अभावात्मक ही देने पड़ते थे। प्रसन्नता की बात है कि श्री पं. सुरेन्द्र शर्मा काव्य तथा वेद तीर्थ ने उपर्युक्त यज्ञों में से पुत्रेष्टि-यज्ञ की पद्धति लिखकर एक बड़ी भारी कमी को पूरा किया है-इस पद्धति की विशेषता यह है कि इसमें न केवल यज्ञ पद्धति ही दी गई है किन्तु पति और पत्नी के लिए ऐसी काफी सामग्री एकत्रित की गई है जिनके जान लेने से अच्छे माता और पिता बन सकते हैं|