योग मानवता के लिए पूर्ण संदेश हैं। योग भारत की प्राचीनतम संस्कृति व अमूल्य निधि हैं, जिसे हमारे प्राचीन ऋषि, मनीषियों ने प्रयोगात्मक अनुभव के आधार पर आविष्कृत किया है। योग भास्कर में योग की मूल धारणाओं और अभ्यासों पर प्रकाश डाला गया हैं। प्रथम भाग में योग की 24 परिभाषा, इतिहास, योग की विभिन्न धारा, 24 महान योगियों का संक्षिप्त जीवन परिचय आदि महत्वपूर्ण पक्षों पर प्रकाश डाला हैं वहीं द्वितीय भाग में षट्कर्म, आसन, प्राणायाम, मुद्रा, बन्ध, योग निद्रा, यौगिक आहार आदि का वर्णन हैं। योग के सैद्धान्तिक व प्रयोगात्मक पक्ष का हठयोग के ग्रन्थों के अनुसार व्यवाहारिक विवेचन किया गया हैं।