Description
"श्रीमद्भागवत के संवादों एवं उपदेशों का तात्त्विक विवेचन" शीर्षक से सम्बद्ध प्रस्तुत प्रस्तुत ग्रन्थ सुभाषित सत्संग स्वरूप है। इसके अध्ययन, मनन, चिन्तन एवं निदिध्यासन से मानव समाज समुन्नति के शिखर को प्राप्त करने में सक्षम होगा। मानव जीवन के उत्कृष्ट संविधान के रूप में यह ग्रन्थ अपना गौरवपूर्ण स्थान रखता है। श्रीमद्भागवत के संवाद और उपदेश नैतिकता और सदाचरण के संदेशक हैं जिनसे मानव जीवन तो सुचारु बनता ही है। साथ ही समाज और राष्ट्र का भी अभ्युदय और कल्याण सुनिश्चित है। मानवता, दया, सत्य, अहिंसा, अस्तेय, पवित्रता, सत्कर्म सौहार्द, सद्विद्या आदि सद्गुण ग्रहण की शिक्षा श्रीमद्भागवत के इन संवादों और उपदेशों से प्राप्य है।
डॉ. कल्याण सिंह रावत ने अपने अथक परिश्रम एवं शोध संयुक्त सुदृष्टि से श्रीमद्भागवत के संवादों एवं उपदेशों के सत्त्यात्त्मक तत्त्वों का अन्वेषण कर लोकहित में इस विषयक विचारावलियों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित कराया है। इनका यह कार्य अत्यन्त श्लाघनीय है। पुस्तक लोकोपयोगी सिद्ध होगी ऐसा पूर्ण विश्वास है।