{"product_id":"संपूर्ण-हस्तरेखा-शास्त्र","title":"संपूर्ण हस्तरेखा शास्त्र - Sampurna Hast Rekha Shastra","description":"\u003cp style=\"text-align: left;\"\u003eमात्र \"जीव\" से ही जीवन की कल्पना की गयी है। स्पंदन महत्वपूर्ण तत्व है। जन्म और मृत्यु जीवन के मुख्य पक्ष हैं। वर्तमान जीवन पूर्व जन्मों का परिणाम है। वैज्ञानिक इसे अणुओं और परमाणुओं का मात्र संयोग मानते हैं। ये अनिवार्य क्रियाएँ हैं। जन्म और मृत्यु के बीच का समय जिसे हम कह सकते हैं अवकाश-लेकिन इस अवकाश में विश्राम न करके हमें गतिशील, हर पल गति में रहना है, क्योंकि भौतिक विज्ञान अपनी तमाम परिकल्पनाओं और सिद्धांतों से तर्कपूर्वक सिद्ध करता है कि हमारा शरीर अणुओं और परमाणुओं से बना है और उन्हें गतिशील रहना है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp style=\"text-align: left;\"\u003eजब हम इस अवकाश या कहें गतिशील अवकाश को व्यतीत करना चाहते हैं तो हमें ध्यान देना पड़ता है अपनी शक्तियों की ओर, अपनी दैनिक व पारिवारिक जिम्मेदारियों की तरफ और उस गंतव्य तक पहुँचने के लिए रास्ते में आने वाली रुकावटों को समझने व दूर करने की ओर हम निरंतर प्रेरित रहें।\u003c\/p\u003e\n\u003cp style=\"text-align: left;\"\u003eजैसे-जैसे हमारी ज़रूरतें बढ़ती जाती हैं वैसे-वैसे उन्हें प्राप्त करने की इच्छा भी हममें बलवती हो जाती है और हम एक अति भौतिकवादी जिंदगी में जीने के लिए मजबूर हो जाते हैं। असफलताएँ हमें निराश और हतोत्साहित करती हैं। सफलतायें हमें प्रसन्नचित्त रखती हैं तथा प्रेरित करती हैं। गतिशील रहने के लिए कभी-कभी हम अपने आपको कठिन पाते हैं अपनी परिस्थितियों से सामंजस्य बनाए रखने में।\u003c\/p\u003e\n\u003cp style=\"text-align: left;\"\u003eइंग्लैंड, अमेरिका, जापान आदि उन्नतिशील राष्ट्रों में भी भौतिक समृद्धता के बावजूद जीव का आध्यात्मिक व नैतिक उत्थान नहीं हो सका। करोड़ों की संख्या में लोग नाना प्रकार के मानसिक व शारीरिक रोगों से पीड़ित हैं।\u003cbr\u003eभारत एक धार्मिक देश है। धर्म व शास्त्रों के अनुसार जन्म व मृत्यु के बीच के जीवन को व्यतीत करने के लिए अनेक सुझाव हैं जो विद्याओं पर आधारित हैं, जिनके अनुसार हमें अपने भूत काल की सही रूपरेखा मिलती है; जिनके अध्ययन मात्र से हमें सुविधा होती है सुचारु रूप से मनचाही और आनंदमयी जिंदगी जीने की और जिंदगी के संघर्षों से परिचित होने और उनका मुकाबला करने की।\u003c\/p\u003e\n\u003cp style=\"text-align: left;\"\u003eसामुद्रिक शास्त्र को भारतवर्ष में प्राचीन काल से प्राथमिकता दी गई है। कुछ प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है कि चीन में तीन सौ वर्ष ईसा पूर्व और रोम में दो हज़ार वर्ष ईसा पूर्व इन शास्त्रों का अस्तित्व था।\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Vimal Jain","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49490540626058,"sku":"9789381794142","price":300.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0592\/8583\/1818\/files\/IMG_20260603_0002.jpg?v=1780467883","url":"https:\/\/www.motilalbanarsidass.com\/products\/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a3-%e0%a4%b9%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0","provider":"Motilal Banarsidass","version":"1.0","type":"link"}