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सिगलोवादसुत्त- Sigalovadasutta

Publisher: Sanmati Prachya Shodh Sansthan, Nagpur
Language: Hindi
Total Pages: 42
Available in: Paperback
Regular price Rs. 150.00
Unit price per
Tax included.

Description

प्रस्तावना
(संशोधित संस्करण : ग्रन्थ द्वितीय)


गौतम बुद्ध ने बताया कि मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है - मनुष्यों को भीतर-बाहर सभी प्रकार के दुःखों से छुटकारा दिलाना। इस महान् लक्ष्य को स्वीकार करने के साथ ही मनुष्य के लिए यह नितान्त आवश्यक हो जाता है कि वह समस्त प्राणियों में अपरिमित मैत्री का विस्तार करें। गौतम बुद्ध ने कहा है, यथा-                                                                                                                                                                              माता यथा नियं पुत्तं, आयुसा एकपुत्तमनुरक्खे।
एवम्पि सब्बभूतेसु, मानसं भावये अपरिमाणं ।।                                                                                          
अर्थात् माता अपने इकलौते पुत्र की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह नहीं करती, उसी प्रकार मनुष्य को चाहिए कि सम्पूर्ण प्राणियों की रक्षा के लिए, उनके प्रति सीमारहित मैत्री भावना का विस्तार करें। उन्होंने सम्पूर्ण मानव जाति से अपील की कि सृष्टि की सारी मानुषी प्रजा से मैत्री स्थापित करों ।
पिछले सात वर्षों से इस ग्रन्थ की हजारों प्रतियों से ज्यादा प्रकाशन, ग्रन्थ को पालि साहित्य के क्षेत्र में मिली लोकप्रियता का प्रमाण है। इस संस्करण में पालि के शब्दों को नालंदा संस्करण एवं विपश्यना विशोधन विन्यास संस्करण के आधार पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। बहुत से पाठकों के राय के अनुरूप इस ग्रन्थ में बोधिनी दिया गया है, जिसके माध्यम से विद्वानों एवं शोधार्थियों को इस ग्रन्थ का अत्यधिक लाभ मिल सकें।
ग्रन्थ के इस संस्करण के प्रस्तुतिकरण में कुछ लोगों से बहुमूल्य सुझाव एवं सहायता मिली है। उन सबके प्रति मैं आभार प्रकट करने के साथ ही कुछ नामों का उल्लेख करना बहुत