{"product_id":"स्नातक-संस्कृत-व्याकरण","title":"स्नातक संस्कृत व्याकरण","description":"\u003cp style=\"text-align: left;\"\u003eसंस्कृत विश्व की प्राचीनतम समृद्ध एवं विकसित भाषा है। भारतीय एवं पाश्चात्य विद्वान् इसे वैज्ञानिक और दोषरहित भाषा के रूप में मुक्तकण्ठ से स्वीकार करते हैं और वैदिक संस्कृत में निबद्ध वेद संसार के समस्त ग्रन्थों में प्राचीनतम माने जाते हैं। वस्तुतः ऋग्वेद ही विश्व के पुस्तकालय का प्रथम उपलब्ध ग्रन्थ-रत्न है। जिस प्रकार संस्कृत वाङ्मय में वेद का सर्वोत्कृष्ट स्थान है, उसी प्रकार वेद के शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष-इन षड् अंगों में व्याकरण का स्थान सर्वोत्कृष्ट है और व्याकरण को वेद-पुरुष का मुख कहा गया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp style=\"text-align: left;\"\u003eसंस्कृत वाङ्मय में व्याकरण को सर्वोच्च स्थान पर प्रतिष्ठित करते हुए साहित्यशास्त्राचार्य आनन्दवर्धन भी 'ध्वन्यालोक' के प्रथम उद्योत में लिखते हैं कि - 'प्रथमे हि विद्वांसो वैयाकरणाः, व्याकरणमूलत्वात् सर्वविद्यानाम्।' संस्कृत व्याकरण के प्रमुख आचार्य पतञ्जलि ने 'महाभाष्य' के प्रारम्भ में ही कहा है - \"ब्राह्मणेन निष्कारणं षडङ्गो वेदोऽध्येयः ज्ञेयश्च तथा षट्सु अङ्गेषु प्रधानं व्याकरणम्, प्रधाने च कृतो यत्नः फलवान् भवति।\"\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp style=\"text-align: left;\"\u003eअब प्रश्न उठता है कि व्याकरण शास्त्र का जब इतना अधिक महत्त्व है, तो यह व्याकरण क्या है? इसकी क्या परिभाषा है? मुख्यतः 'व्याकरण' की शाब्दिक व्युत्पत्ति इस प्रकार की जा सकती है।\u003c\/p\u003e","brand":"Babulal Meena","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50124556533898,"sku":"9789381953914","price":500.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0592\/8583\/1818\/files\/Screenshot2026-09-03112927.png?v=1788415183","url":"https:\/\/www.motilalbanarsidass.com\/products\/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a3","provider":"Motilal Banarsidass","version":"1.0","type":"link"}