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मानस एवं गीता लोकमंगल-गुंजिता- Manas evam Gita Lokmangal-Gunjita

मानस एवं गीता लोकमंगल-गुंजिता- Manas evam Gita Lokmangal-Gunjita

Publisher: Motilal Banarsidass
Language: Hindi
Total Pages: 252
Available in: Hardbound
Regular price Rs. 295.00
Unit price per
Tax included.

Description

Manas evam Gita: Lokmangal-Gunjita" एक गूढ़ और विचारशील शीर्षक प्रतीत होता है, जो संभवतः रामचरितमानस और भगवद गीता के साथ लोककल्याण (Lokmangal) और जीवन के उच्चतम उद्देश्य को जोड़ता है। यहाँ पर "गुंजिता" शब्द का अर्थ स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह "गुंजन" से संबंधित हो सकता है, जिसका अर्थ है गूंजना या किसी विशेष प्रभाव या ध्वनि का प्रसार।

आइए, इसे अधिक विस्तार से समझते हैं:

  1. रामचरितमानस (Manas): यह तुलसीदास द्वारा रचित एक प्रसिद्ध काव्य है, जो भगवान राम के जीवन के चरित्र और उनके आदर्शों पर आधारित है। यह भारतीय संस्कृति और धर्म में महत्वपूर्ण स्थान रखता है, और यह जीवन के उच्चतम आदर्शों और नैतिकताओं का परिचायक है।

  2. भगवद गीता (Gita): यह महाभारत का एक हिस्सा है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से धर्म, कर्म, भक्ति, और जीवन के सत्य के बारे में संवाद किया। गीता का संदेश है कि हर व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए, ईश्वर की भक्ति और आत्मज्ञान के मार्ग पर चलना चाहिए।

  3. लोकमंगल (Lokmangal): लोकमंगल का अर्थ होता है "समाज का कल्याण" या "विश्व का कल्याण।" यह एक उच्च उद्देश्य की ओर इंगीत करता है, जिसमें व्यक्ति न केवल अपनी भलाई का विचार करता है, बल्कि समाज और सृष्टि के कल्याण की दिशा में भी कदम बढ़ाता है। यह अवधारणा अक्सर धार्मिक और दार्शनिक ग्रंथों में पाई जाती है, जहाँ व्यक्ति को समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए प्रेरित किया जाता है।

  4. गुंजिता (Gunjita): यह शब्द शायद "गुंजन" से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है "ध्वनि का प्रसार या गूंजना।" इसे एक प्रतीकात्मक रूप में लिया जा सकता है, जैसे किसी विचार का या संदेश का व्यापक रूप से फैलना या गूंजना। यह "लोकमंगल" के विचार के साथ जुड़ा हो सकता है, जो समाज में एक सकारात्मक बदलाव या प्रभाव उत्पन्न करने का विचार हो सकता है।

सारांश: "Manas evam Gita: Lokmangal-Gunjita" शायद एक ग्रंथ या विचार का शीर्षक हो सकता है, जो रामचरितमानस और भगवद गीता के शिक्षाओं को जोड़कर समाज के कल्याण और धर्म के सिद्धांतों को विस्तृत करता है। "गुंजिता" शब्द इस संदेश के व्यापक प्रसार या प्रभाव को दर्शाता है, जिससे यह आशा की जा सकती है कि यह ज्ञान समाज में गूंजे और एक सकारात्मक बदलाव लाए।