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Sanskrit sahitya chintan

Sanskrit sahitya chintan

Publisher: Eastern Book Linkers
Language: Hindi
Total Pages: 388
Available in: Hardbound
Regular price Rs. 1,450.00
Unit price per
Tax included.

Description

साहित्य समाज का दर्पण है। साहित्य इतिहास से पृथक् होता है। इतिहास जहाँ तथ्यात्मक होता है वहीं साहित्य कलात्मक होता है। उसका उद्देश्य माधुर्य, आनन्द आदि के साथ-साथ वस्तुस्थिति से परिचित कराना है, जबकि इतिहास का माधुर्य या आनन्द से कोई प्रयोजन नहीं। किसी भी देश की संस्कृति, सभ्यता का मूल वाहक उस देश का साहित्य ही होता है; क्योंकि उसमें उस देश की संस्कृतियों के उत्थान, पतन, परिवर्तन और परिवर्धन का इतिहास सुरक्षित होता है। साहित्य ही उस देश की सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, नैतिक, सांस्कृतिक मर्यादाओं, विचारों, चिन्तन, कला, उन्नति, अवनति, आचार-विचार, मान्यताओं, विश्वासों आदि को प्रतिबिम्बित कर हमें उनसे परिचित कराता है। संस्कृत साहित्य इस दिशा में कुछ अधिक ही प्रभावकारी रहा है। गद्य, पद्य, नाटक, काव्य, कथा आदि के माध्यम से संस्कृत साहित्यकारों ने विपुलतम साहित्य की सर्जना की है।

संस्कृत वाङ्मय से सम्बद्ध प्रस्तुत संस्कृत साहित्य चिन्तन नामक पुस्तक में 7 अध्यायों में 44 शोध आलेख हैं और निश्चय ही यह भारतीय मेधा की परिचायक है। यद्यपि ये सभी स्वतन्त्र आलेख चैवालीस अध्यायों के तुल्य हैं तथापि इनकी विषयवस्तु की समानता और अध्ययन सौकर्य के आधार पर इनको आर्षकाव्य चिन्तन आदि सात अध्यायों में बाँटा गया है। जिनमें संस्कृत साहित्य के समसामयिक, आध्यात्मिक एवं दार्शनिक विषयों एवं अनेक तथ्यों को विभिन्न शोध आलेखों के माध्यम से सरलतापूर्वक संस्कृत पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया है।