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नवयौवनदिगदर्शनम-Navayovandigdarshanam (2017)

नौ जवान : एक बानगी
Publisher: Devvani Parishad
Language: Hindi
Total Pages: 180
Available in: Paperback
Regular price Rs. 450.00
Unit price per
Tax included.

Description

मेरी सीमा/मेरा सामर्थ्य (मेरी बात/मेरी औकात)

'लघुसिद्धान्त कौमुदी' में यण सन्धि के उदाहरणों में 'लाकृति' भगवान् कृष्ण का पर्याय बताया जाता था। आगे चलकर इसे नौ अंक के रूप में देखा गया। नौजवान शब्द आज तक अपरिवर्तनीय है। (यह दूसरी बात है कि नौजवान असमय में दुर्व्यसनरोगाक्रान्त होकर असाध्य होता जा रहा है।) कभी विचार आया था नौजवान पर कलम चलायी जाये। उसी विचार का मूर्तरूप 'नौजवान-एक बानगी' है।

आप मेरी इन बातों पर विश्वास कर सकते हैं-

१. इस सामग्री संकलन में मेरी कोई मौलिकता नहीं है।

२. यथाशक्ति सप्रमाण तथ्य प्रस्तुत किये हैं। स्रोतों में अखबार, रेडियो, समाचारों के विविध चैनल, अनेक ग्रन्थों को पूरा सम्मान दिया गया है।

३. 'अमर उजाला', 'हिन्दुस्तान' आदि समाचार पत्र मेरठ-सहारनपुर क्षेत्र के ही समझे जायें।

४. यथावसर आयी/दिखायी गयी संख्याओं को तब तक जोड़ते जायें, जब तक योग ९ न आ जाये। जैसे २७० को २+७+०-२७, २+७=९ । कुछ ईसवीय वर्षों की घटनाओं में तारीख ही प्रधान है। कहीं कहीं तारीख, महीना और वर्ष भी।

५. इस बृहदाकार लेख/पुस्तक को शोध लेख न समझा जाय। यथास्थान सन्दर्भ दिये गये हैं।

६. साहित्य प्रेमियों के लिए मूल उदाहरण और जन सामान्य के लिए सामान्य अनुवाद दिया गया है।

७. लेख को दुरूहता और भाषा की क्लिष्टता से यथामति बचाने का प्रयत्न किया गया है।

८. मिली-जुली सूचनाओं से बच्चों के सामान्य ज्ञान में भी वृद्धि होगी-ऐसा विश्वास है।

९. यह पुस्तक उन सभी भारतीय नौजवानों को सप्रेम समर्पित है,