Description
वैदिक एवं पौराणिक साहित्य में गणपति का वर्णन इनकी महत्ता का द्योतक है। भारत सहित चीन, जापान इत्यादि कई देशों में गणपति की प्राप्त प्रतिमायें उनकी लोकप्रियता को प्रमाणित करता है। तन्त्रशास्त्र के अनेक ग्रन्थों में गणपति उपासना की विविध विधियाँ बताई गई हैं। तन्त्र की गोपनीयता एवं सुव्यवस्थित पुस्तकों के अभाव के कारण साधकों एवं श्रद्धालु उपासकों को साधना में विविध कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। तन्त्र में निर्दुष्ट पुस्तकों का नितान्त अभाव है। भाषागत अशुद्धि के कारण लाभ की जगह हानि की प्रबल सम्भावना रहती है। भगवान् उच्छिष्ट-गणपति की साधना एवं कृपा तथा अनेक शिष्य, पाठकों एवं साधकों के अनवरत आग्रह के कारण ही यह ग्रन्थ पूर्ण हो सका है।
उच्छिष्ट-गणपति के अनेक गुप्तप्रयोगों को इस ग्रन्थ में उद्घाटित किया गया है; जिन् गुरुजनों-ग्रन्थों से ये अलभ्य प्रयोग सुलभ हुए हैं उनके प्रति मैं सादर शिरसा प्रणति पूर्वक आत्मिक आभार और अभिवादन अभिव्यक्त करता हूँ। प्रकाशक को सावधानी से कार्य करने के लिए भूरिशः धन्यवाद देता हूँ; जिनकी तत्परता पूर्वक मनोज्ञ मुदमङ्गलमयी सद्भावना से यह कार्य सुव्यवस्थित रूप से प्रकाशित हो सका। उनकी कार्यकुशलता एवं प्रभावक विनम्रता अभिनन्दनीय है।