Description
प्राचीन भारत में अनेक कवियों ने मधुर महाकाव्य, खण्डकाव्य तथा रस परिपूर्ण अनेक नाटक लिखकर संस्कृत साहित्य को अत्यन्त समृद्ध किया है। वाल्मीकि और महर्षि वेदव्यास ने रामायण एवं महाभारत नामक अद्भुत ग्रन्थ लिखे। उन उपजीव्य ग्रन्थों को आधार बनाकर महाकवि भास, कालिदास, भवभूति और माघ आदि कवियों ने सुन्दर काव्यों एवं नाटकों की रचना की तथा संस्कृत साहित्य के कलेवर को निरन्तर बढ़ाया। श्रेष्ठ संस्कृत रचनाओं को लिखने की परम्परा आज भी निर्बाध गति से चल रही है।
विगत शताब्दी में अनेक कवियों ने सैकड़ों महाकाव्य, खण्डकाव्य एवं नाटक लिखे हैं। नवीन रचनाओं के सन्दर्भ में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, हरियाणा, उत्तराखण्ड, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक के विद्वानों का विशेष योगदान रहा है। उत्तर प्रदेश के आचार्य रेवाप्रसाद द्विवेदी, आचार्य मिथिला प्रसाद त्रिपाठी, श्रीकृष्ण सेमवाल, पं० विद्याधर शास्त्री, भट्ट मथुरानाथ शास्त्री, महामहोपाध्याय पण्डित नवल किशोर कांकर, पण्डित गिरिधर शर्मा चतुर्वेदी, आचार्य जगदीश शास्त्री, पण्डित श्री राम दबे, डॉ० पुष्कर दत्त शर्मा, प्रो० हरिराम आचार्य, डॉ० रमाकान्त शुक्ल, अभिराज राजेन्द्र मिश्र, प्रो० राधा वल्लभ त्रिपाठी, प्रो० सुभाष तनेजा