Description
लाओत्से चीन के महान दार्शनिक थे। लाओत्से के यह सूत्र आज से दो हजार वर्ष पूर्व कहे गये हैं। लाओत्से के ये सूत्र विश्व के मनोविज्ञान को एक नई दिशा प्रदान करते हैं। लाओत्से धर्म को, स्वभाव को "ताओ" कहते हैं।
लाओत्से के इस दर्शन में ईश्वर को कोई स्थान नहीं है। लाओत्से के सूत्र सीधे और साफ हैं। आज लाओत्से के सूत्रों का महत्त्व सबसे ज्यादा है। जब लाओत्से ने यह सूत्र कहे थे, तब उनका इतना महत्त्व नहीं था। क्योंकि लाओत्से की सारी बातें अत्यधिक चैतन्य वाले मनुष्यों के लिये हैं।
जब लाओत्से ने ये सूत्र कहे थे, तब मनुष्य इतना बुद्धिशाली नहीं था। आज का मनुष्य, ज्ञात मनुष्यजाति के इतिहास का सबसे ज्यादा बुद्धिमान मनुष्य है। लाओत्से के सूत्र हमारी इंटेलीजेंस बढ़ाने के सूत्र हैं। सम्पूर्ण दृष्टि परिवर्तन के सूत्र हैं।
लाओत्से के सूत्र हमारी तीसरी आँख जगाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं। यह अपनी तरह के अनूठे सूत्र हैं। लाओत्से हर वस्तु को सीधे-सीधे देखने के पक्षधर हैं। इससे ये सूत्र हमें वो आँख प्रदान करते हैं, जहाँ से हम हर वस्तु, घटना और विचारों के मूल तक जा सकें।
जब लाओत्से की ख्याति बढ़ गयी, तब लाओत्से चीन छोड़ देना चाहते थे। इसी प्रयास में चीन की सरहद पर लाओत्से को पकड़ लिया गया। सिपाहियों ने लाओत्से को बगैर सम्पत्ति कर चुकाये, चीन की सरदह पार करने से मना किया। लाओत्से को बात समझ में नहीं आयी। क्योंकि न तो उनके पास कोई सम्पत्ति थी, न ही वे कोई सम्पत्ति लेकर जा रहे थे।
लाओत्से ने सिपाहियों से उनके कहने का तात्पर्य पूछा। सिपाहियों ने कहा, हम आपकी खोपड़ी में छिपे रहस्यों की पूँजी की बात कर रहे हैं। जब तक आप कागज पर आपको ज्ञात संसार के रहस्यों को नहीं लिखते, तब तक आप सरहद छोड़कर नहीं जा सकते हैं। उस समय लाओत्से ने फटाफट ये सूत्र लिखे। यही सूत्र "ताओ ते चिंग" के नाम से मशहूर है।