Description
मानव जीवन में योग केवल शारीरिक अभ्यास भर नहीं है, बल्कि यह आत्मिक संतुलन, मानसिक शांति और जीवन की पूर्णता का अद्वितीय साधन है। योग मनुष्य को स्वयं से जोड़कर उसे व्यापक चेतना और उच्चतर उद्देश्य की ओर अग्रसर करता है।
आज की भागदौड़ भरी, तनावग्रस्त और चुनौतीपूर्ण जीवनशैली में योग वह दीपक है, जो अंधकारमय राहों को आलोकित कर स्थिरता, सामंजस्य और संतोष प्रदान करता है।
समय के साथ योग ने अपनी पारंपरिक सीमाओं को लांघकर एक गहन शैक्षिक और शोधपरक विषय का रूप ग्रहण किया है। यह न केवल स्वास्थ्य और जीवनशैली का आधार है, बल्कि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम तथा प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में भी वैज्ञानिक एवं शास्त्रीय दृष्टिकोण से अध्ययनीय विषय बन चुका है। विशेषकर यूजीसी नेट एवं जेआरएफ जैसी परीक्षाओं में योग की प्रासंगिकता और भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।
इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत पुस्तक (बृहद योगज्ञान) का संकलन किया गया है। इस पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें योग के विविध आयामों-शास्त्रीय दर्शन, शरीर विज्ञान, मनोविज्ञान तथा समकालीन शोध-को सरल एवं क्रमबद्ध शैली में प्रश्नोत्तर रूप में प्रस्तुत किया गया है। उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते समय एक ही स्थान पर समग्र और विश्वसनीय सामग्री प्राप्त कर सकें।
इस पुस्तक का लक्ष्य मात्र प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि पाठकों को योग के गूढ़ सिद्धांतों और व्यावहारिक पक्ष की गहराइयों से परिचित कराना भी है। हमारा विश्वास है कि यह पुस्तक न केवल प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए, बल्कि अध्यापकों, शोधार्थियों और योग में रुचि रखने वाले सभी साधकों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।