बौद्धचर्या-विधि पुस्तक के लेखक जन्म 1 अप्रैल सन् 1923 ई. को कुशीनगर के भारतवर्ष में बौद्ध धर्म के पुनर्जागरण में इनका साहित्य के विकास के लिए पालि भाषा व अनेकों महत्त्वपूर्ण ग्रन्थों का सृजन किया। उन्होंने
सोसायटी ऑफ इण्डिया, सारनाथ केन्द्र के संयुक्त
त्रिपिटकाचार्य डॉ. भिक्षु धर्मरक्षित महाथेरो का समीप हतवा नामक ग्राम में हुआ था। आधुनिक महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने बौद्ध साहित्य एवं बौद्ध धर्म-दर्शन से सम्बन्धित धर्मदूत पत्रिका के सम्पादक, महाबोधि
सचिव, मूलगंधकुटी विहार के विहाराधिपति,
महाबोधि इण्टर कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं बरईपुर के ग्राम प्रधान के रूप में भी कार्य किया। सम्प्रति आज वे हमारे
बीच नहीं रहे। 23 मई सन् 1977 ई० में 54 वर्ष की अल्पायु में ही उनका देहान्त हो गया।