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भारत में वोकिज़्म का नैरेटिव

Publisher: Motilal Banarsidass
Language: Hindi
Total Pages: 125
Available in: Paperback
Regular price Rs. 400.00
Unit price per
Tax included.

Description

यह पुस्तक भारत में वोकिज्म का नैरेटिव न केवल वोकिज्म की अवधारणा, उत्पत्ति, विकास और प्रभावों की विवेचना करती है, अपितु भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में इसके खतरे और टकरावों का भी विश्लेषण करती है। भारत, जिसकी वैचारिक विरासत विविधता में एकता, सहिष्णुता, संवाद और आत्मानुशीलता की रही है, वहाँ पर वोकिज्म जैसे पश्चिम प्रेरित विचार की स्वीकृति अनेक जटिलताओं को जन्म देती है। चूंकि Wokeism एक अभारतीय अवधारणा है। अतः इस पुस्तक में इससे संबंधित जो जो शब्दावलियां प्रयुक्त की गई है, उन्हें ज्यों का त्यों प्रयुक्त किया गया है। क्यूंकि वोकवाद के अंतर्गत अभारतीय मूल्यों एवं संदर्भों का भारतीयकरण करने का षड्यन्त्र किया जाता है। इसलिए प्रयास यह किया गया है कि उन शब्दों एवं संदभों को उन्ही के अर्थों में समझा जाए। अंत में, यह पुस्तक जागरण' के नाम पर 'विभाजन' करने वाले विचारों के विरुद्ध संवाद, संवेदना और संविचार की पुनःस्थापना का एक विनम्र प्रयास है। यह कृति शोधार्थियों, विद्यार्थियों, बुद्धिजीवियों, नीति-निर्माताओं, शिक्षकों और भारत की सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक वैचारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।