अष्टांग योग सबसे पुरानी व प्रचलित योग साधना पद्धति है। मुख्य रूप से अष्टांग योग को योगदर्शन की साधना माना जाता है, लेकिन इस पुस्तक में हमने अष्टांग योग साधना का यौगिक साहित्य के परिप्रेक्ष्य में अवलोकन करने का काम किया है। जिसके परिणामस्वरूप हमने पाया कि अष्टांग योग साधना के प्रमाण वेदों, उपनिषदों, पुराणों, श्रीमद्भगवदगीता, वशिष्ठ संहिता, आयुर्वेद के साथ-साथ हठयोग के ग्रन्थों में भी मिले हैं। जिनका वर्णन इस पुस्तक में किया गया है। पाठकों को इस पुस्तक में अष्टांग योग साधना के विषय में शोधपरक दृष्टिकोण देखने को मिलेगा। यह पुस्तक सभी पाठ्यक्रमों के साथ-साथ शोध विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगी ।