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  • आओ, जरा सोचे- Aao, Jara Sochen! (2008)
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आओ, जरा सोचे- Aao, Jara Sochen! (2008)

Publisher: Swati Academy
Language: Hindi
Total Pages: 130
Available in: Hardbound
Regular price Rs. 450.00
Unit price per
Tax included.

Description

सर्वप्रथम

अक्सर कहा जाता है कि 'इतिहास स्वयं को दोहराता है।' इतिहास स्वयं को क्यों दोहराता है? यह प्रश्न बहुधा उद्वेलित भी करता रहता है। इस प्रश्न का उत्तर भी इस विचार के रूप में सामने आया है कि इतिहास स्वयं को इसलिए दोहराता है कि हम उससे कोई सबक लें। पर हम उन्हीं सब बातों की पुनरावृत्ति करते रहते हैं जो हमसे पहले की पीढ़ियां कर चुकी हैं।

इतिहास की बार-बार घटित होने वाली घटनाओं पर तत्कालीन चिंतकों, लेखकों, कवियों द्वारा प्रतिक्रियाएं भी व्यक्त की जाती रही हैं जिनमें किसी घटना-विशेष के मूल कारणों की समीक्षा भी होती है, पर हम केवल घटना को याद रखते हैं, उससे तत्कालीन समाज को मिली सीखों को नहीं। उन पर ध्यान ही नहीं देते और इसी कारण इतिहास को स्वयं को दोहराने का अवसर मिल जाता है।

समकालीन राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक प्रवृत्तियों की प्रतिक्रिया स्वरूप मेरे मानस में भी कुछ विचार उठे, मैं समय-समय पर लिपिबद्ध करता रहा। विभिन्न आयोजनों में उनका वाचन भी करता रहा। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनका प्रकाशन भी होता रहा। श्रोताओं, पाठकों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं से मुझे यह संबल मिला कि मेरे समान अन्य लोग भी सोचते हैं। ऐसे लोग जो किसी रूढ़ि, किसी संप्रदाय, किसी विचार के अंधभक्त नहीं हैं। ऐसे ही कुछ लोगों ने मुझसे अनुरोध भी किया कि मैं अपनी अभिव्यक्तियों को पुस्तकाकार प्रकाशित करवाऊं, लेकिन पुस्तक का प्रकाशन आज आसान काम कहां है?

आओ. जरा सोचें! 5