Description
प्रस्तुत पुस्तक 'प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित 'एम.ए. योग साईस' के के पाठ्यक्रमानुसार लिखी गई है। मनुष्य के शरीर का निर्माण पंच महाभूत (अग्नि, जल, वायु, आकाश और पृथ्वी) से हुआ है। अप्राकृतिक भोजन से प्राकृतिक के इन पांच तत्वों का असंतुलन हो जाता है तो शरीर विभिन्न रोगों से ग्रासित हो जाता है। प्राकृतिक चिकित्सा से हमारा आहार व दिनचर्या ठीक होने से बहुत सारे शारीरिक विकार ठीक हो जाते है।
प्रस्तुत पुस्तक में प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमानुसार चार इकाइयों में विभाजित की गई है। प्रथम इकाई में प्राकृतिक चिकित्सा के के स्वरूप, इतिहास, सिद्धांत और मूल तत्वों का उल्लेख किया गया है। द्वितीय इकाई में जल चिकित्सा के महत्त्व एवं प्रयोग का विस्तृत रूप से वर्णन किया गया है। तृतीय इकाई में मिट्टी चिकित्सा, मिट्टी के प्रकार, वायु चिकित्सा और सूर्य चिकित्सा द्वारा विभिन्न रोगों में उपचार की विधियों का विवेचन किया गया है। चतुर्थ इकाई में आहार एवं उपवास चिकित्सा के महत्त्व को उल्लेख किया गया है।
प्रस्तुत पुस्तक सरल भाषा में रुचिकर बनाकर लिखी गई है। जिससे विद्यार्थी प्राकृतिक चिकित्सा की विभिन्न विधियों को समझ कर लाभ उठा सकें। आशा है विद्यार्थीगण प्रस्तुत पुस्तक से ज्ञान प्राप्त करके अपने भविष्य को उज्जवल बनाने का सफल प्रयास करेंगें।