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योग

योग

(A Way of Life)
Publisher: Ronak Publication House Pvt. Ltd.
Language: Hindi
Total Pages: 170
Available in: Paperback
Regular price Rs. 432.00
Unit price per
Tax included.

Description

योग परंपरा भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि रही है। हमारे ऋषि-मुनियों, संत-महात्माओं, मनीषियों, योगियों एवं योग आचायों ने अपने-अपने दौर में योग के महत्व को प्रमुखता से रेखांकित किया है। प्रतिस्पर्धात्मक एवं भौतिकता के इस दौर में योग मानव के लिए संजीवनी बूटी की तरह साबित हो रहा है। इसी वजह से आज योग सामान्य व्यक्ति के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। आधुनिक समय में योग एक व्यवसाय भी बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के बाद संपूर्ण विश्व में योग की क्रांति आ गई है। आज विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में योग का पाठ्यक्रम शुरू हो चुका है।

योग का परंपरागत विशुद्ध ज्ञान विद्यार्थियों के साथ साथ आम जन तक पहुंचे, इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, प्रस्तुत पुस्तक की रचना की गई है। पंद्रह अध्यायों में विभाजित इस पुस्तक में योग से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है। प्रथम अध्याय योग परिचय है, जिसमें योग का अर्थ, परिभाषा, इतिहास एवं विकास, योग का महत्व आदि पहलुओं पर विस्तृत प्रकाश डाला गया है। योग विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं को ध्यान में रखते हुए तथा योग को गुरु- शिष्य परंपरा के द्वारा व्यवस्थित तरीके से हम तक पहुँचाने वाले, प्राचीन से वर्तमान समय तक के प्रसिद्ध योग गुरुओं के छायाचित्र दिए गए हैं।

दूसरे अध्याय में योग के प्रमुख प्रकार, अष्टांग योग, हठयोग, ज्ञानयोग, कर्मयोग एवं भक्तियोग के बारे में रचनात्मक चर्चा की है। तृतीय अध्याय में महर्षि पतंजलि रचित योगसूत्र, स्वामी स्वात्माराम रचित हठप्रदीपिका, महर्षि घेरण्ड रचित घेरण्ड संहिता एवं महर्षि वेदव्यास रचित श्रीमद्भगवद्गीता का वर्णन किया गया है। चतुर्थ एवं पंचम अध्यायों में क्रमशः योग शिक्षकों एवं योगासाधकों के लिए सामान्य दिशा-निर्देश बताए गए हैं। क्योंकि योग की प्रैक्टिकल एवं थ्योरी दोनों तरह की कक्षा में गुरु एवं शिष्य दोनों को योग संबंधित कुछ महत्त्वपूर्ण सिद्धांतों एवं नियमों का पालन करना होता है। जिसका वर्णन इन्हीं दोनों अध्यायों में किया गया है।

छठे अध्याय में गर्दन से लेकर टखनों तक सूक्ष्म व्यायाम की अभ्यास विधि के विभिन्न चरण, लाभआदि पर विस्तृत प्रकाश डाला गया है। सातवें अध्याय में सूर्यनमस्कार की अभ्यास विधि, लाभ एवं क्या नहीं करना चाहिए आदि की चर्चा की गई है। आठवें अध्याय में 40 से अधिक आसनों का अर्थ, अभ्यास विधि, लाभ एवं किसे नहीं करने चाहिए आदि पर विस्तृत प्रकाश डाला गया है। नौवें अध्याय में आठ प्रणायामों की अभ्यास विधि, लाभ एवं कौन न करे आदि का सचित्र वर्णन किया गया है।