Description
योग एवं वैकल्पिक चिकित्सा भारतीय संस्कृति का मूल धरोहर है जिसके ज्ञान में जीवन दर्शन का संपूर्ण रहस्य छिपा हुआ है जिसके अंगीकरण करने से जीवन उत्कर्ष एवं सुखमय होगा एवं लक्ष्य प्राप्ति में सफलता प्राप्त होगी, शास्त्रों में भी कथन है कि सफल वही व्यक्ति होता है जो शरीर से स्वस्थ्य हो, निरोग हो एवं मन के स्तर पर संयत, शांत व संतुलित हो। अतः योग जीवन जीने की कला सिखाता है। योग एवं वैकल्पिक चिकित्सा की व्यापकता व लोकप्रियता को देखते हुए आधुनिक युग में योग को अत्यधिक व्यवहारिक एवं अनुकरणीय बनाने तथा मानवों में योग के प्रति रूचि जाग्रत करने के उद्देश्य से ही "साधना समन्वय" पुस्तक लेखन का प्रयास किया गया है।
"साधना समन्वय" नामक पुस्तक को पाठकों, योग शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं योग प्रेमियों की सेवा में प्रस्तुत करते हुए हमें अपार हर्ष हो रहा है। इस पुस्तक की लोकप्रियता को बनाए रखने के उद्देश्य सें इस पुस्तक में योग एवं वैकल्पिक चिकित्सा के प्रमुख तत्वों का समन्वय किया गया है। देखा जाए तो अभी तक योग एवं वैकल्पिक चिकित्सा से संबंधित पुस्तक अप्राप्त है। इस कमी को ध्यान में रखते हुए इस पुस्तक की रचना की गई है, जो विश्वविद्यालयो में संचालित पाठ्यक्रम के अध्ययन व अध्यापन में सहायक सिद्ध होगी। इस पुस्तक में लोगों को योग, आयुर्वेद, पंचकर्म, चुंबक चिकित्सा, एक्युप्रेशर, प्राणिक हीलिंग एवं मर्म चिकित्सा को जानने, समझने में उपयोगी सिद्ध होगी।
पुस्तक की विषय वस्तु की दृष्टि से देखा जाए तो पुस्तक के इस संस्करण में योग, आयुर्वेद, पंचकर्म, चुंबक चिकित्सा, एक्युप्रेशर, प्राणिक हीलिंग एवं मर्म चिकित्सा रचना का सरल व सुंदर प्रकार से अवलोकन कर उसकी अवधारणा, विकास क्रम, साधना पक्ष एवं सिद्धांतों का संपूर्ण परिचय संक्षिप्त रुप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है, जिसका पठन-पाठन प्रतियोगी परीक्षाओं में सहायता प्राप्त होगी।