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Abhilekh Ratanmala

Abhilekh Ratanmala

Publisher: Saraswatam Publications
Language: Hindi
Total Pages: 190
Available in: Paperback
Regular price Rs. 300.00
Unit price per
Tax included.

Description

आधुनिक युग में विश्व के प्राचीनतम भारतीय अभिलेखों को पढ़ना अत्यन्त ही चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है। अनेक भारतीय एवं पाश्चात्य विद्वान् प्राचीन अभिलेखों की लिपियों को पढ़ने का श्लाघनीय प्रयास करते रहे हैं। किन्तु अबतक के सर्वाधिक शुद्धतम रूप (भाषा, व्याकरण, छन्द एवं विषयवस्तु इत्यादि) की दृष्टि से पुस्तक का यह संस्करण आपलोगों के समक्ष उपस्थित है, जिसे संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान् महामहोपाध्याय प्रो० उमाशङ्कर शर्मा 'ऋषि' जी ने सम्पादित किया है। लेखक ने अभिलेख की समझ विकसित करने हेतु इस पुस्तक की विस्तृत भूमिका लिखकर तत्कालीन समाज की परिस्थितियों को मानो प्रत्यक्ष कर दिया है। ब्राह्मी, शारदा आदि लिपियों में प्राप्त अभिलेखों का ऐसा संस्कृतानुवाद तो अन्यत्र दुर्लभ ही है। 

लेखक ने अनेकत्र मूल अभिलेखों के लेखक की भाषा सम्बन्धी त्रुटियों के सम्बन्ध में भी उपयोगी टिप्पणी देकर पुस्तक को अत्यधिक उपादेय बना दिया है। विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में अभिलेख का समावेश होने से यह पुस्तक संस्कृत के छात्रों के लिए महान् उपकारक है; क्योंकि इसकी व्याख्या से छात्र मूलपाठ को सहजता से हृदयङ्गम कर लेते हैं। साथ ही इतिहास के अनुसंधाताओं के लिए भी यह पुस्तक निःसन्देह अत्यधिक उपयोगी है। अगर ऐतिहासिक दृष्टि से इस पुस्तक को पढ़ा जाय तो प्राचीन भारत के गौरवमय अतीत का साक्षात्कार किया जा सकता है एवं इतिहास के विस्मृत अध्याय का पुनर्लेखन किया जा सकता है।