Description
जब से ये ब्रह्माण्ड बना है तब से अंकों की आवश्यकता पड़ी है और तब से अंक अस्तित्व में आए हैं हालाँकि शून्य अंक का अस्तित्व उससे पूर्व में से है। नते ही मनुष्य को ज्ञान बहुत देर में प्राप्त हुआ। इस ब्रह्माण्ड में अनेकों पुंज च्या पिण्ड है। इन सभी की अभिव्यक्ति बिना अंकों के सम्भव नहीं है। अंक अस्तित्व में आदि काल से ही हैं। अंकों के अस्तित्व कही जानकारी आरम्भिक बैर में मनुष्य को नहीं थी।
मनुष्य द्वारा ऐसी कोई भाषा नहीं बनी थी जिससे नानव का इनका उपयोग कर सके तथा इनको अपने दैनिक जीवन की काफी नमस्याएँ आसानी से सुलझ गई हैं। वस्तुओं के विनिमय में, सामाजिकताओं को निभाने में, व्यवहारिक जगत से जुड़े कार्यों में, दैनिक जगत से जुड़ें कार्यों में अंकों च्च योगदान अत्यनत सराहनीय है। कक्षा के विद्यार्थियों की संख्या भी इन्हीं में प्रदर्शित है। विभिन्न समुदायों के मनुष्यों की गिनती भी इन्हीं में सम्भव है। मानव के लिए आवश्यक सामग्री की वस्तुओं चाहे वे अन्न हों या फल उनकी गिनती त्या उनका आकलन इन्हीं के द्वारा सम्भव हो पाया है।
इस ब्रह्माण्ड में जब कोई पुंज और पिण्ड नहीं था तब समस्त ब्रह्माण्ड शून्य समान था अथार्थ यह तब भी अंक द्वारा प्रदर्शित था। आज ब्राह्माण्ड में असंख्य पुंज और पिण्ड है जो यहाँ से अनन्त योजन दूर हैं। हम कह सकते हैं जब ब्रह्माण्ड में कोई भी भौतिक क्स्तु नहीं थी तब भी उस समय ईश्वर था। अतः शून्य अंक की अभिव्यक्ति इंश्वर-तुल्य है। आज असंख्य पिण्ड हैं तथा वे अनगिनत दूरी पर हैं तब भी इस अनन्त अंक की अभिव्यक्ति ईश्वर तुल्य है। यहाँ ऐसा लगता है कि अंकों का अस्तित्व ईश्वर के अस्तित्व के समान है।