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bhagwan mahavir adhunik sandarbh

Publisher: Motilal Banarsidass
Language: Hindi
Total Pages: 350
Available in: Hardbound
Regular price Rs. 450.00
Unit price per
Tax included.

Description

डॉक्टर नरेंद्र भानावत हिंदी, राजस्थानी और जैन साहित्य के प्रकांड विद्वान थे। वे राजस्थान विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष रहे। मात्र 59 वर्ष की उम्र में कैंसर से संघर्ष करते हुए 4 नवंबर 1993  को उनका निधन हो गया। उनका पूरा जीवन संघर्ष की एक अप्रतिम कहानी है। उदयपुर जिले के एक छोटे से गांव कानोड में आपका जन्म हुआ था। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया था। मां डेलूबाई नितांत अनपढ़ थी लेकिन फिर भी उन्होंने इन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने संघर्ष, योग्यता और प्रतिभा के बल पर अपनी विभिन्न परीक्षाओं में सर्वोच्च अंक प्राप्त किए और अंततः राजस्थान विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में लगभग 30 वर्ष तक अपनी सेवाएं दीं। प्रमुख जैन शोध पत्रिका जिनवाणी के भी 30 वर्षों से अधिक समय तक संपादक रहे। उनके संपादन में जैन धर्म दर्शन पर केंद्रित जिनवाणी के अनेक विशेषांक चर्चित हुए।