'नैदानिक मनोविज्ञान' का प्रथम संस्करण आपके समक्ष है। यह एक ऐसी पुस्तक है, जिसकी रचना भारतीय विश्वविद्यालयों में चार वर्षीय सेमेस्टर प्रणाली स्नातक पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए की गयी है। यह न सिर्फ छात्रों के लिए बल्कि शिक्षकों के लिए भी काफी उपयोगी है। परीक्षा में पूछे जाने वाले संभावित प्रश्न भी प्रत्येक अध्याय के अंत में दिये गये हैं।
इस पुस्तक में कुल पाँच अध्याय हैं, जिसमें कई महत्वपूर्ण विषय-वस्तुओं पर चर्चा की गयी है। नैदानिक मनोविज्ञानः परिचय, विभिन्न क्षेत्रों में नैदानिक मनोवैज्ञानिकों की भूमिका, नैदानिक मूल्यांकन एवं प्रविधि, व्यक्तित्व का मापन और नैदानिक हस्तक्षेप या मनोचिकित्सा आदि विषयों पर तथ्यपूर्ण एवं सारगर्भित विचार प्रस्तुत किये गये हैं।