Description
पाठकों द्वारा इस पुस्तक का बार-बार अध्ययन करने पर उन्हें इस पुस्तक का सार अधिक स्पष्ट होता जाएगा। दो व्यक्तियों के हाथों पर समान जीवन रेखा प्राप्त है तब उन्हें समान जीवन रेखीय दोष प्राप्त रहेंगे। ये जीवन रेखीय दोष यह आवश्यक नहीं है कि जीवन-रेखा द्वारा व्यक्त फलों को ही प्रभावित करेंगे, इसकी अपेक्षा ये दोष स्वयं के अलावा अन्य रेखाओं और अन्य भागों द्वारा व्यक्त फलों को प्रभावित करते हैं।
समान जीवन रेखीय दोष प्राप्त करने पर भी व्यवहार में उन्हें, उनको समान रूप से नहीं भुगतना पड़ता है तथा लक्षण भी उनमें समान रूप से दिखायी नहीं पड़ते हैं।
उपायों का अध्ययन करते हैं तब यह पाते हैं कि हस्त शास्त्रीय दोष कतिपय व्यवहारोनुकूल स्वजात हरकतों, घटनाओं को दोहराने या बार-बार करने से कमी पाते हैं। जैसे व्यक्तियों द्वारा नालों को पार करना। सभी व्यक्तियों द्वारा समान बार, सम्मान रूप से नाला पार नहीं किया जाता है। यह कार्य व्यक्ति दैनिक जीवन के कार्यों को निभाने व आवश्यकतानुसार उन्हें करने के उद्देश्य से करता है। व्यवहार में यह विभिन्न लोगों द्वारा भिन्न-भिन्न बार अपनाए जाने से विभिन्न मात्रा में प्राप्त रहता है। विभिन्न प्रकार के रेखीय दोष किस प्रकार की रेखाओं द्वारा दर्शाए जाते हैं उन्हें यहाँ नीचे वर्णित किया जा रहा है।