Description
भारतीय ज्योतिम एक शास्त्र ही नहीं, अपितु विज्ञान भी है। इसी का मूल ग्रन्थ "लाल विका" उर्दू, फारसी और अरबी भाषाओं की निलीजुली रखना है। लेखक ५० रूप चन्द्र जोशी व प्रकाशक गिरधारी लाल शर्मा जी ने अत्यन्त परिभाष से पुस्तक लिखी व छापी, किन्तु क्यूँ, फारसी व अरबी भाषा सामान्यवन की समझ से परे है। इस नहेलियों से भी "लाल किताब" अन्य को सरल और उपयोगी बनाया प्रसिद्ध ज्योदिगाचार्य व तमाचार्य प्रेमकुमार शर्मा (खानी प्रेमानन्द अलब्ख) जी ने, जिन्होंने इस ग्रन्थ सभी गहन विगयों का विवेचन दिया है।
ग्रह, राशि, नक्षत्र, योग, स्त्री जातक, घर स्थानों के भाव, राशियों का ज्ञाम, उच्च ख नीत्र ग्रहों के आपस में सम्बन्ध व फल, बर्मी, पापी, स्त्री-पुरुच, नपुंसक व सोथे हुए ग्रह, पैतृक ऋष्ण, कालसर्प व दोष, ग्रहों के आधार पर दिन, खानपान, रहन-सहन, लग्गों में विशेष फल, राशि में हराम, ग्रहों की बुष्टि तथा मित्र व शत्रु और उनके अनुसार वस्तुएं, देवता, के अनुसार आयु, अल्पायु योग, ग्रहों को युति के अनेक प्रश्नों का उत्तर देती है" लाल किताब"।