Description
मुगल सम्राट अकबर के शासन काल के दौरान मालवा की एक छोटी सी रियासत माण्डू का शासक वाजबहादुर था। उसका नाम बायजिदे बाज बहादुर खान था। उसने ईस्वी सन् 1555 से 1562 तक माण्डू पर राज्य किया वह माण्डू पर स्वतंत्र रूप से राज्य करने वाला अंतिम शासक था।
यह वही माण्डू है जिसका नाम महमूद गोरी ने सादियाबाद कर दिया था। खोर नर्मदा नदी की घाटी में स्थित एक छोटी सी नगरी धरमपुरी के एक राजपूत राठौड परिवार के ताहन सिंह की बेटी थी रूपमति अनिद्य सुंदरी, मधुर स्वरों की गायिका मां नर्मदा देवी की अनन्य भक्त।
एक अति रोमाण्टिक नाटकीय अप्रत्याशित रूप से रूपमति बाजबहादुर का आमना सामना हो जाता है। अन्ततः रूपमति के पिता कठोर विरोध के बाद भी रूपमति का बाजवहादुर का विवाह हो जाता है। रूपमति ने सिर्फ इसी शर्त पर विवाह की स्वीकृति दी थी कि वह प्रतिदिन माण्डू से मां नर्मदा के दर्शन कर सके।
रूपमति के अप्रतिम सौन्दर्य तथा अति मधुर गीतों की गायिका के रूप में उसकी प्रसिद्धि मुगल सम्राट अकबर तक भी पहुंची। अकबर रूपमति को अपने हरम में सम्मिलित करने का महत्वाकांक्षी था। इसी इरादे से अकबर ने आघम खान के नेतृत्व में एक बड़ी फौज माण्डू पहुंची। युद्ध में बाजबहादुर पराजित हो गया आधमखान ने जय के गर्व से चूर होकर रूपमति को पाना चाहता था। परन्तु रूपमति ने आधमखान के समक्ष समर्पण करने के बजाय जहर खाकर अपने प्राणों की आहूति दे दी।
यह लघुकृति रानी रूपमति, माण्डू के शासक बाजबहादुर के अमर निस्वार्थ प्रेम समर्पण के त्याग की अद्भुत प्रेम कहानी यह किताब उस समय के मालवा की राजनैतिक स्थितियों बाजबहादुर के संघर्ष, जय पराजयों के अलावा माण्डू में उपलब्ध ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के वर्तमान तक शेष स्मारकों को यथा हिंडोला महल, जहाज महल, रूपमति पैवेलियन बाजबहादुर का महल, शोकुण्ड, अशर्फी महल की भी जानकारी देती हैं।