Description
वैद्य माधवकर ने "पर्यायरत्नमाला" में आयुर्वेद सम्बन्धी शब्द-रत्नों को एक माला में पिरोकर शब्दकोष का प्रारूप दिया है; जिसमें आयुर्वेद की जड़ी-बूटी एवं औषधियों के नामों का व्यवस्थित संकलन है। यह चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, अष्टांग हृदय, भावप्रकाश इत्यादि की तरह एक मौलिक एवं स्वतन्त्र ग्रन्थ है। यह ग्रन्थ न केवल एक संदर्भ पुस्तक के रूप में उपयोगी है, बल्कि आयुर्वेद के प्रति जिज्ञासा जगाने वाला एक ज्ञानकोश भी है।
"पर्यायरत्नमाला" आयुर्वेद जगत् में प्रवेश करने वाले प्रत्येक जिज्ञासु, छात्र, शोधार्थी और चिकित्सक के लिए एक अमूल्य शब्द-कोश के रूप में ग्राह्य है। आयुर्वेद अपनी समृद्ध परंपरा, गहन दार्शनिक आधार और प्रकृति-आधारित चिकित्सा पद्धति के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है; किंतु इसके अध्ययन में सबसे बड़ी बाधा इसकी पारिभाषिक शब्दावली को अर्थ सहित समझना रहा है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर "पर्यायरत्नमाला" का सम्पादन एवं अनुवाद किया गया है।
अनुवादक एवं सम्पादक ने प्रत्येक शब्द का हिन्दी, लैटिन एवं अंग्रेजी में अर्थ देकर इस ग्रन्थ का उद्धार किया है और इसे आयुर्वेद जगत् के लिए अत्यन्त उपादेय बना दिया है।
यह आयुर्वेद के विशाल ज्ञानभंडार को सरल बनाने का एक प्रयास है। हमें विश्वास है कि यह ग्रंथ आयुर्वेद के अध्ययन, अध्यापन और प्रयोग में छात्रों एवं अध्यापकों का निरन्तर मार्गदर्शन करेगा।